श्री महालक्ष्मी पूजन
जय माँ लक्ष्मी, माँ लक्ष्मी की कृपा आप सब भक्तो पर सदा बनी रहे प्रिय भक्तो दीपाली में भगवती लक्ष्मी की विशेष पूजा की जाती है। जिससे घर में सर्वादा माँ की कृपा बनी रहती है। और धन वैभव की कमी नही होती है। क्यो कि माँ लक्ष्मी का पूजा से सभी इच्छा पूर्ण हो जाती है। क्योकि भगवती लक्ष्मी चल एवं अचल दृश्य एवं अदृश्य सभी संपत्ति और सिद्धियो एवं निधियां की साक्षात् देवी है। भगवान गणेण का पूजा किसी भी शुभ कार्य में सबसे पहले किया जाता है। जिस पुजा में गणेश जी की पूजा सर्वप्रथम नहीं होता है वह पूजा पूर्ण नही माना जाता और उसका पूर्ण लाभ भी नही मिलता है।भगवान श्री गणेश सिद्धि बुद्धि के एवं शुभ और लाभ के स्वामी तथा सभी अमंगलों एवं विघ्नों के नाशक है वे सत्य बुद्धि प्रदान करने वाले हैं अतः इनके समवेत पूजन से सभी कल्याण मंगल एवं आनंद प्राप्त होते है
कार्तिक कृष्ण अमावस्या को भगवती लक्ष्मी एवं भगवान गणेश की नया मुरती का प्रतिष्ठा पूर्वक विशेष पूजन किया जाता है । पूजन के लिए किसी चौकी पर सफेद कपड़े का पवित्र आसन बनाकर गणेश जी के दाहिने भाग में माता महालक्ष्मी को स्थापित करना चाहिए । पूजन के दिन घर को स्वच्छ कर पूजन स्थान को भी पवित्र करना चाहिए और स्वयं ही स्नान आदि कर पवित्र हो श्रद्धा भाव से सायंकल में इसका पूजन करना चाहिए। श्री महालक्ष्मी जी के पास ही किसी पवित्र पात्र में केसर चंदन से अष्टदल कमल तथा स्वास्तिक बनाकर उस पर द्रव्य लक्ष्मी ( रुपयों) को भी स्थापित करके एक साथ ही दोनों की पूजा करनी चाहिए । पूजन सामग्री को यथास्थान रख ले सर्वप्रथम पूर्व दिशा की तरफ या उत्तर दिशा की तरफ मुह कर के आचमन पवित्र धारण मार्जन प्राणायाम कर अपने ऊपर तथा पूजन सामग्री पर निम्न मंत्र बोलकर जल छिड़के
पवित्री मंत्र
ॐ अपवित्र पवित्रो वा सर्वावस्थां गतोपि वा।
ॐ यः स्मरेत् पुण्डरीकाक्षं स बाह्याभ्यन्तरः शुचिः।।
आसन शुद्ध और स्वस्ति पाठ कर ले( स्वास्तिक पाठ हर भक्तों को अपने घर पर रोज करना चाहिए स्वास्तिक पाठ करने से मन शांत होती है तथा घर में भी शांति बना रहता है) सुपारी पर मौली लपेट का गौरी गणेश बनाकर अपने सामने अक्षतों पर स्थापित कर लें ।( बछिया (जो गाय बच्चा) होती हैं उसके भी गोबर से चाहे तो आप गौरी गणेश बना सकते हैं )तदन्तर हाथ में जल अक्षतादि
आदि लेकर पूजन का संकल्प करें
संकल्प ( दीर्घ संकल्प)ॐ विष्णवे नमः , ॐ विष्णवे नमः ,ॐ विष्णवे नम श्रीमद्भगवतो महा पुरुच्षस्य विषणोराज्ञया प प्रवर्तमानस्य ब्रह्मणो द्वितीयपरार्धे श्री श्वेतवाराहकल्पे वैवस्वत मन्वन्तरे अष्टा विशंतितमे कलियुगे कलि प्रथम चरणे बौद्धावतारे भूर्लोंके जम्बुद्वीपे भारतखण्डे भारत वर्षे आर्यावर्तैकदेशे … . … . क्षेत्रे नगरे ग्रामे … … .. नाम संवत्सरे … … . मासे ( शुक्ल/कृष्ण ) पक्षे … … तिथौ … .. वासरे … … … गोत्र … … . शर्मा/ वर्णा
… … नक्षत्र … … योग … … करण … … सूर्योदय (समय) … … चन्द्रोदय (समय) /गुप्तोऽहम् प्रातः मध्याहने , सायं
अहं अद्य मम सर्वारिष्ट निरसनपूर्वक सर्व पापक्षयार्थ दीर्घायुरारोग्य धन धान्य पुत्र पौत्रादि समस्त सम्पत्प्रवृद्धयर्थ श् श्रुति स्मृति पुराणोक्त फल प्राप्त्पर्थ मम ऐश्ववर्याभिः वृद्धयर्थ अप्राप्त लक्ष्मी प्राप्त्यर्थ प्राप्त लक्ष्म्या श्चिचरकाल संरक्षणार्थ सकल मनः इप्सितकामना संसिद्धयर्थ
समस्त भय व्याधिजरा पीड़ा मृत्यु परिहारद्वारा आयुरारोग्यैश्वर्यद्यभिवृद्धर्थ दश दिक्पाल प्रसन्नता सिद्धयर्थम
अधिदैविक अधिभौतिक अध्यात्मिक, त्रिविध तापोपशमनार्थ धर्माथ काम मोक्ष फल प्राप्त्यर्थ नित्य कल्याण लाभाय भगवत्प्रीत्यर्थ च अमुक कर्म (पूजा व्रत हवन आदि) करिष्ये
संकल्प ( लघु संकल्प)ॐ विष्णवे नमः , ॐ विष्णवे नमः ,ॐ विष्णवे नम श्रीमद्भगवतो महा पुरुच्षस्य विषणोराज्ञया प प्रवर्तमानस्य ब्रह्मणो द्वितीयपरार्धे श्री श्वेतवाराहकल्पे वैवस्वत मन्वन्तरे अष्टा विशंतितमे कलियुगे कलि प्रथम चरणे बौद्धावतारे भूर्लोंके जम्बुद्वीपे भारतखण्डे भारत वर्षे आर्यावर्तैकदेशे … . … . क्षेत्रे नगरे ग्रामे … … .. नाम संवत्सरे … … . मासे ( शुक्ल/कृष्ण ) पक्षे … … तिथौ … .. वासरे … … … गोत्र … … . शर्मा/ वर्णा / गुप्तोऽहम् प्रातः मध्याहने , सायं
अहं अद्य मम सर्वारिष्ट निरसनपूर्वक सर्व पापक्षयार्थ दीर्घायुरारोग्य धन धान्य पुत्र पौत्रादि समस्त सम्पत्प्रवृद्धयर्थ श् श्रुति स्मृति पुराणोक्त फल प्राप्त्पर्थ
नित्य कल्याण लाभाय भगवत्प्रीत्यर्थ च अमुक कर्म (पूजा व्रत हवन आदि) करिष्ये
यह संकल्प पढ़ कर जल अक्षत आदि गौरी गणेश के पास छोड़दे पुजन से पूर्ण गौरी गणेश की निम्न रीति से प्राण प्रतिष्ठा कर ले
प्रतिष्ठा
बाये हाथ में अक्षत लेकर निम्न मन्त्रो को पढ़ते हुए दाहिने हाथ से उन अक्षतो को गौरी गणेश पर छोड़ता जाय
ॐ मनो जूतिर्जुषतामाज्यस्य बृहस्पतिर्यज्ञमिंग तनोत्वरिष्टं यज्ञ गुंग समिम दधातु । विश्वे देवाश इह मदयन्तामो ३ म्प्रतिष्ठ ।
ॐ अस्यै प्राणाः प्रतिष्ठन्तु अस्पै प्राणाः क्षरन्तु च अस्यै देवत्वमर्चायै मामहेति चकश्चन इस मत्र से प्रतिष्ठा कर माता गौरी और भगवान गणेश का विधिवत षोडशोपचार पूजन करे
आवश्यक सामाग्री
अक्षत
रोरी
फुल ,
फल ,
माला
सुंगाधित तेल
गुलाब जल
सिन्दुर
फल
मिठाई
समी पत्र
कपूर
अगरबत्ती
घी
दूध
गंगाजल
दहि
पंचामृत
मधु
रक्षा
पान
सोपाड़ी
लवंग
इलाइची
प्रधानपुजा (सर्व प्रथाम पूजा)
गणेश और माता लक्ष्मी की नया प्रतिभा बाजार से खरीद ले और उसमे प्राण प्रतिष्ठा करके( प्राण प्रतिष्ठा मंत्र ऊपर दिया गया है।)
इसके बाद हाथ में अक्षत जल पुष्प लेकर माता लक्ष्मी और गणेश भगवान का ध्यान करें
ध्यान मंत्र
गजाननं भूतगणादिसेवितं कपित्थ जम्बु फल चारभक्षणम् उमासुत । शोकविनाशकारक नमामि विघ्नेश्वर पाद पड्कजम ॥
इतना कह कर हाथ में जो अक्षत जल फूल आदि लिये है उसे गणेश और माता लक्ष्मी जीपर चढ़ा दे
इसके आवाहन मंत्र से आवाहन करे
आवाहन (मां लक्ष्मी के बुलाने का मंत्र)
एह्येहि हेरम्ब महेश पुत्र समस्तविध्नौविनाशदक्ष ।
माङ्गल्यपूजाप्रथमप्रधान गृहाण पूजां भगवान् नमस्ते ‘॥
ॐ हिरण्यवर्णां हरिणीं सुवर्णरजतस्त्रजाम् ।
चन्द्रा हिरभयीं लक्ष्मीं जातवेदो म आ वह ॥
ॐ लक्ष्मी गणपतिभ्यां नमः । आवाहनार्थे पुष्पाणि समर्पयामि । इतना कह कर आवाहन के लिए फुल चढ़ाये
(मातालक्ष्मी और गणेश जी का आवाहन करने के बाद आसन दिया जाता है)
आसन मंत्र ( बैठने के लिए प्रार्थना करना)
तप्तकाञ्चनवर्णाभं मुक्ता मणिविराजितम् ।
अमलं कमलं दिव्यमासनं प्रतिगृह्मताम् ॥
ॐ तां भ म आ वह जातवेदो लक्ष्मीमनपगामिनीम् ।
यस्यां हिरण्यं विन्देयं गामश्वं पुरुषानहम् ॥
ॐ लक्ष्मीगणपतिभ्यां नमः । आसनार्थे पुषपणि समर्पयामि ।
(इतना कह कर आसन के लिए अक्षत या फुल चढ़ाये)
पाद्य मंत्र (चरण धोना)
गङ्गादितीर्थसम्भूतं गन्धपुष्पादिभिर्युतम् ।
पाघम ददाम्यहं देव गृहाणाशु नमोऽस्तु त ॥
ॐ अश्वपूर्वां ह्वये श्रीर्मा देवी जुषताम् ॥
ॐ लक्ष्मीगणपतिभ्यां नमः । पादयोः पाद्यं समर्पयामि ॥
इतना कहकर पाद्य के लिए चन्दन पुष्य जल आचमनी के लिए चढाचे
अर्ध्य मंत्र( हाथ धोना)
गन्धपुष्पाक्षतैर्युक्तमध्य सम्पादित मया ॥
गृहाणार्ध्य मया दतं प्रसन्नो वरदो भव ॥
ॐ कां सोस्मितां हिरण्य प्राकारामार्द्रां ज्वलन्तीं तृप्ता तर्पयन्तीम् ।
पह्मेनेस्थितां पद्मवर्णां तामिहोप ह्वये श्रियम् ॥
ॐ लक्ष्मीगणपतिभ्यां नमः । हस्तयोरर्ध्य समर्पयामि
(अष्ट गन्ध जल मिश्रित कर अर्ध्यपात्र से हाथों में दे)
आचमन मंत्र ( मुंह शुद्धि के लिए मंत्र)
कर्पूरेण सुगन्धेन वासितं स्वादु शीतलम् ।
तोयमाचमनीयार्थं गृहाण परमेश्वर ॥
ॐ लक्ष्मीगण पतिभ्यां नमः । आचमनीयं जलं समर्पयामि ।
जल छोड़ दें
(आम की पत्ते से जल माता लक्ष्मी गणेश जी पर छिड़के)
सरल हिंदी अर्थ: हे परमेश्वर (भगवान गणेश और माता लक्ष्मी)! कपूर की सुगंध से सुगंधित, पीने में बहुत स्वादिष्ट और शीतल जल मैं आपके आचमन (मुख धोने के लिए अर्पित कर रहा हूँ, कृपया इसे स्वीकार करें।
स्नान ( शुद्ध स्नान के लिए मंत्र) - मन्दाकिन्यास्तु यद् वारि सर्वपायहरं शुभम् ।
तदिदं कल्पितं देव स्नानार्थं प्रतिगृह्यताम ॥
ॐ लक्ष्मीगणपतिभ्यां नमः स्नानं समर्पयामि
जल छोड़ दें
आचमनीय के लिए जल छोड़दें
(आम की पत्ते से जल माता लक्ष्मी गणेश जी पर छिड़के)
हिंदी अर्थ: हे प्रभु!(माता महालक्ष्मी और गणेश) गंगा जी का यह पवित्र जल जो सब प्रकार के पापों को दूर करता है और बहुत ही कल्याणकारी है, आपके स्नान के लिए मैं लेकर आया हूँ। हे देव/ देवी (माता महालक्ष्मी)कृपा करके इस स्नान जल को ग्रहण करें।
दुग्धस्नान मंत्र (दूध से स्नान)
कामधेनुसमुत्पन्नं सर्वेषां जीवनं परम्।
पावनं यज्ञहेतुश्च पयः स्नानार्थमर्पितम्॥
हिंदी अर्थ: सबकी इच्छाएं पूर्ण करने वाली कामधेनु गाय से उत्पन्न हुआ पवित्र दूध, संसार के सभी जीवों को जीवन देने वाला माता कामधेनु का दूध, बहुत पवित्र और यज्ञ के कामों में उपयोग होने वाला यह पवित्र दूध मैं आपके स्नान के लिए अर्पित करता हूँ।कृपया इसे स्वीकार करें।
ॐ पयः पृथिव्यां पय ओषधीषु पयो दिव्यन्तरिक्षे पयो धाः।
पयस्वतीः प्रदिशः सन्तु मह्यम्॥
हिंदी अर्थ: इस पूरी धारा पर शुद्ध दूध का वास हो, औषधियों में उत्तम और पवित्र रस का वास हो, अंतरिक्ष और आकाश में जल व पोषण का संचार हो तथा संसार की सभी दिशाएं मेरे लिए सुख, समृद्धि धन वैभव और पोषण देने वाली हो जाएं। अर्थात् आप की कृपा हमेशा मेरे ऊपर बना रहे
दधिस्नान (दही से स्नान कराने का मंत्र )
पयसस्तु समुद्भूतं मधुराम्लं शशिप्रभम्।
दध्यानीतं मया देव स्नानार्थं प्रतिगृह्यताम्॥
हिन्दी अर्थ :
चन्द्रमा के सामान चमक वाले गाय के दूध से बनने वाले स्वादिष्ट एवं खट्टे मीठे स्वाद वाले दही से मैं स्नान करा रहा हूँ हे माँ, हे देवी हे, ममता की सागर कृपया इसे स्वीकार करे संस्कृत मंत्र:
ॐ दधिक्राव्णो अकारिषं जिष्णोरश्वस्य वाजिनः। सुरभि नो मुखा करत्प्र ण आयूंषि तारिषत्॥ हिन्दी अर्थ
हमारे हृदय को सुगंधित करने वाले चारो ओर के क्षेत्र को सुंगाधित करने वाले तथा सबको जितने वाले (सर्वविजेता ) और बहुत ही गतिमान तथा दिव्य घोड़े के सामान, हम परमात्मा को याद करते है। वे हमारे मुख और इंद्रियो को पवित्र, शुद्ध व सुंगंधित करे और हमें दीर्घ आयु प्रदान करे
विनियोग मंत्र:
ॐ लक्ष्मीगणपतिभ्यां नमः। दधिस्नानं समर्पयामि। दधिस्नानान्ते शुद्धोदकस्नानं समर्पयामि। हिन्दी अर्थ : मैं ॐ लक्ष्मी-गणपति को को प्रणाम करता हुँ । मैं लक्ष्मी गणपति को दही का स्नान समर्पित करता हूँ। दही से स्नान कराने के बाद पुनः शुद्ध जल का स्नान समर्पित करता हूँ। घृतस्नान (घी से स्नान कराने का मंत्र) संस्कृत श्लोक:
नवनीतसमुत्पन्नं सर्वसंतोषकारकम्।
घृतं तुभ्यं प्रदास्यामि स्नानार्थं प्रतिगृह्यताम्॥ हिन्दी अर्थ : मक्खन से निकला हुआ अर्थात शुद्ध घी माक्खन को आग पर तपा कर निकाला जाता है। और सभी को संतुष्ट व तृप्त अर्थात हर प्रकार से सुख प्रदान करने वाले हे देव! इस शुद्ध घी से स्नान रहा हूँ, कृपया इसे स्वीकार करें। संस्कृत मंत्र:
ॐ घृतं घृतपावानः पिबत वसां वसापावानः पिबतान्तरिक्षस्य हविरसि स्वाहा॥ दिशः प्रदिश आदिशो विदिश उद्दिशो दिग्भ्यः स्वाहा॥
हिन्दी अर्थ : हे घी का पिने वाले देवता गण आप इस पुष्टि कारण शुद्ध घी को ग्रहण कीजिए। हे वसा को पीन वाले भगवान आप इसका पान करें। हे घृत तुम पूरे अंतरिक्ष के यज्ञ सामग्री हैं, आपके लिए यह आहुति समर्पित है (स्वाहा)। सभी दिशाएं, उपदिशाएं आकाश पताल ब्रह्मांण के सभी कण इस श्रृष्टी के सभी जीव जन्तु और दसों दिशाएं इस आहुति से तृप्त हों। विनियोग मंत्र:
ॐ लक्ष्मीगणपतिभ्यां नमः। घृतस्नानं समर्पयामि। घृतस्नानान्ते शुद्धोदकस्नानं समर्पयामि।
हिंदी अर्थ: सबके दुख को दूर करने वाले देव मै प्रणम करता हुँ । ॐ लक्ष्मी-गणपति को प्रणाम करता हूँ । मैं आपको घी का स्नान अर्पित करता हूँ। घी से स्नान कराने के बाद शुद्ध गंगा जल से पुनः स्नान समर्पित करता हूँ। मधुस्नान (शहद)
संस्कृत श्लोक:
तरुपुष्पसमुद्भूतं सुस्वादु मधुरं मधु।
तेजःपुष्टिकरं दिव्यं स्नानार्थं प्रतिगृह्यताम्॥
हिंदी अर्थ: पेड़े के फूलों के रस से तैयार , रसिला , उत्तम, स्वादिष्ट, मीठे, तेज देने वाला बल प्रदान करने वाला सभी जीवे को श्रृप्त करने वाला और शक्ति (पुष्टि) बल को बढ़ाने वाले इस दिव्य शहद से मैं आपको स्नान रहा हूँ, कृपया इसे स्वीकार करें। संस्कृत मंत्र:
ॐ मधु वाता ऋतायते मधु क्षरन्ति सिन्धवः। माध्वीर्नः सन्त्वोषधीः॥
मधुनक्तमुतोषसो मधुमत्पार्थिवं रजः। मधु द्यौरस्तु नः पिता॥
मधुमान्नो वनस्पतिर्मधुमाँ २ अस्तु सूर्यः। माध्वीर्गावो भवन्तु नः॥
हिंदी अर्थ:
हवायें हमारे लिए सुंगंधित, मधुर तथा अनुकुल धे नदियों का जल हमारे लिए व स्वादृष्ट और मधुर हो सभी प्रकार की औषधियाँ, दवायें, जड़ी बुटी लाभदायक तथा स्वादृष्ट और मधुर हो रात और सुबह दोनो आनंदमय हो मंगलकारी हो मिट्टी हमारे लिए उत्तम हो इसमें हर प्रकार की औषधि जड़ी बुटी वनस्पत्ति प्रचुर मात्रा में तथा लाभदायक उत्पन्न हो ये पेड़ पौधे मधुर स्वमवटित रसिले फल देने वाली हो गाप मधुर और स्वादृष्ट दूध देने वाली हो सूर्य देवता तथा आकाश हमे सुख प्रदान करे यह पूरा ब्रह्माण्ड हमारे लिए कल्याणकारी हो
विनियोग मंत्र:
ॐ लक्ष्मीगणपतिभ्यां नमः। मधुस्नानं समर्पयामि। मधुस्नानान्ते शुद्धोदकस्नानं समर्पयामि।
हिंदी अर्थ: ॐ लक्ष्मी-गणपति को नमस्कार है। मैं आपको शहद का स्नान समर्पित करता हूँ। शहद से स्नान कराने के बाद पुनः शुद्ध जल का स्नान समर्पित करता हूँ
शर्करास्नान
संस्कृत श्लोक:
इक्षुसारसमुद्भूता शर्करा पुष्टिकारिका।
मलापहारिका दिव्या स्नानार्थं प्रतिगृह्यताम्॥
हिंदी अर्थ:
गन्ने से बनने वाला शरीर को ताकत देने वाला गंदगी को दूर हटाने वाला दिव्य चीनी या गुड़ से मैं आप को स्नान करा रहा हूँ है प्रभु /देवी इसे स्वीकार करे तथा हमारे ऊपर अपनी कृपा बनाये रखे
पञ्चामृत—पयो दधि घृतं चैव मधुशर्करान्वितम्।
पञ्चामृतं मयानीतं स्नानार्थं प्रतिगृह्यताम्॥
ॐ पञ्च नद्यः सरस्वतीमपि यन्ति सस्रोतसः।
सरस्वती तु पञ्चधा सो देशोऽभवत् सरित्॥
ॐ लक्ष्मीगणपतिभ्याम् नमः। पञ्चामृतस्नानं समर्पयामि, पञ्चामृतस्नानान्ते शुद्धोदकस्नानं समर्पयामि। हिंदी अर्थ :
हे प्रभु मैं आपका पंचामृत से स्नान करा रहा हूँ जो दूध दही घी शहद (मधु) और शक्कर पाँच पवित्र और शुद्ध वस्तुओ से मिलकर बना है। यह पवित्र पंचामृत स्नान को आप मेरे ऊपर कृपा करके स्वीकार करें
वैदिक मंत्र का अर्थ
जिस प्रकार पाँच नदिया सस्वती नदी में जाकर समा जाती है और उस देश को पांच नदियो वाला देश कहाँ जाता है। उसी प्रकार यह पवित्र स्नान आपके कल्याण के लिए हो।
पंचामृत चढ़ाने से स्नान कराने के बाद पुनः जल शुद्ध गंगा जल से स्नान कराये इसे शुद्धोदक स्नान कहते है।
विशेष नियम:
यदि आप महालक्ष्मी का अभिषेक करना चाहते है जैसे दीपावली या किसी विशेष मनोकामना के लिए तो श्री सुक्त का पाठ करते हुए अखंड जलधारा से शुद्ध गंगा जल या शुद्ध ग गाय के दूध से करें अभिषेक पीतल , चादी , तांबा की मूर्ति पर करे ।गन्धोदक स्नान (सुगंधित चंदन वाले जल से स्नान) संस्कृत मंत्र:
गन्धोदक—मलयाचलसम्भूतं चन्दनागुरुसम्भवम्।
चन्दनं देवदेवेश स्नानार्थं प्रतिगृह्यताम्॥
ॐ लक्ष्मीगणपतिभ्याम् नमः। गन्धोदकस्नानं समर्पयामि। हिंदी अर्थ :
पवित्र और शुद्ध सुगंधित चंदन और अगर मिला कर बना यह पवित्र जल जिसे गन्धोदक कहते है। जो मलय पर्वत पर पाया जाता है मैं आप को इसी गन्धोदक से स्नान कर रहा हुँ हे देवी ‘! येरे ऊपर कृपाकरें इसे स्वीकार करें
पूजा विधि:
जल , सुंगधित द्रव्य जैसे इत या गुलाब जल में शुद्ध चंदन घीस कर मिल ले इसके बाद इससे देवी की मूर्ति को ‘श्र द्वाभाव से स्नान कराये
संस्कृत मंत्र:
शुद्धोदक—मन्दाकिन्यास्तु यद्वारि सर्वपापहरंशुभम्। तदिदं कल्पितं तुभ्यं स्नानार्थं प्रतिगृह्यताम्॥
हिंदी अर्थ (भावार्थ):
हे देवी गंगा जल से स्नान करा रहा हुँ इसे स्वीकार करे यह गंगा जल बहुत पवित्र और शुद्ध है जो सभी पापियों के पापको नष्ट करता है और सबके लिए पवित्र तथा कत्याणकारी होता है। अतः आप इसे स्वीकार करें (इस गंगा जलको भागीरथ ने पृथ्वी पर लाया था )
पूजा विधि: गन्धोधक स्नान के बाद एक बार फिरसे स्नान कराये शुद्ध जल से वस्त्रम्—शीतवातोष्णत्राणं लज्जाया रक्षणं परम्। देहालंकरणं वस्त्रमतः शांतिं प्रयच्छ मे॥ ॐ उपैतु मां देवसखः कीर्तिश्च मणिना सह। प्रादुर्भूतोऽस्मि राष्ट्रेऽस्मिन् कीर्तिमृद्धिं ददातु मे॥ ॐ लक्ष्मीगणपतिभ्याम् नमः। वस्त्रं समर्पयामि, आचमनीयं जलं च समर्पयामि हिंदी अर्थ (भावार्थ): वर्षा हवा ठंडा गर्मी से बचने के लिए मान मर्यादा को बचाने के लिए लज्जा को ढकने के लिए तथा वस्त्रो से शरीर की सुन्दरता बढ़ता है अतः सुन्दरता बढाने के लिए ऐसे पवित्र और सुन्दर वस्त्र मैं आपको अर्पित कर रहा हूँ हे देवी! इसे स्वीकार करे और मेरे घर में सुख शान्ति प्रदान करें । देवताओ अति प्रिय और परम मित्र कुबेर जी कीर्ति व मणि ऐश्वर्य मेरे पास आने की कृपा करे क्योकी मै इसी देश में पैधा हुआ हुं मुझ पर कृपा कर धन वैभव यश समृद्धि शक्ति शन्ति बल आदि प्रदान करे
पूजा विधि : मंत्र बोलने के बाद माता को तथा गणेश जी को वस्त्र या रक्षा चढ़ाये शुद्धि के लिए आम के प्ते से जल चढ़ाये उपवस्त्र—यस्याभावेन शास्त्रोक्तं कर्म किञ्चिन्न सिध्यति। उपवस्त्रं प्रयच्छामि सर्वकर्मोपकारकम् ॐ लक्ष्मीगणपतिभ्याम् नमः। उपवस्त्रं समर्पयामि, आचमनीयं जलं च समर्पयामि हिंदी अर्थ (भावार्थ) उपवस्त्र के विना कोई भी पूजा का कार्य पूरा नही होता शास्त्र में भी बताया गया है अतः मैं सभी कार्यो में प्रयोग होने वाला तथा शुद्ध अवस्त्र आपको प्रदान करता हूँ इसे स्वीकार करे पूजा विधि: इस प्रकार मंत्र बोलते हुए प्रेम से भगवान गणेश को उपवस्त्र के रुप में रक्तसूत्र (लाल धागा) और देवी लक्ष्मी को कंचुकी (चुनरी या सुहाग की सामग्री) चढ़ाएं। इसके बाद आचमन के लिए जल आम के फ्ते से छोड़ें। मधुपर्क समर्पण (शहद और दही का मिश्रण ) संस्कृत मंत्र: मधुपर्क—कांस्येकांस्येनपिहितोदधिमध्वाज्यसंयुतः। मधुपर्को मयानीतः पूजार्थं प्रतिगृह्यताम्॥ ॐ लक्ष्मीगणपतिभ्याम् नमः। मधुपर्कं समर्पयामि, आचमनीयं जलं च समर्पयामि। हिंदी अर्थ (भावार्थ): कांस्य के बर्तन में शहद , घी , और शुद्ध दही मिलकर कांस्य के ढक्कन से बन्द किया गया बहुत पवित्र पावन स्वादिष्ट मुधूपर्क मै के लिए लेकर आप हुँ और स्नेह से प्रेम से श्रद्धा भाव से आपको अर्पित कर रहा हूं । हे भगवन देवी देवता इसे स्वीकार करें पूजा विधि: कांस्य के बर्तन में रखे हुए मधुपर्क जिसे आप शहद, घी, और दही मिला कर बनाये है उसको भगवान के सामने रख दे और फिर आचमन के लिए जल का छोड़ दें वीवी। आभूषण मंत्र (गहने और श्रृंगार ) संस्कृत मंत्र:रत्नकङ्कणवैदूर्यमुक्ताहारादिकानि च। सुप्रसन्नेन मनसा दत्तानि स्वीकुरुष्व भोः॥ ॐ क्षुत्पिपासामलां ज्येष्ठामलक्ष्मीं नाशयाम्यहम्। अभूतिमसमृद्धिं च सर्वां निर्णुद मे गृहात्॥
हिंदी अर्थ (भावार्थ): हे देवी मैं श्रद्धा भाव से आप को आभूषण चढ़ा रहा हूँ जिसमें रत्नो से बना हुआ ( सोना , चाँदी मोती हीरा तथा नाना प्रकार के रत्नो से बना हुआ है। ), वैदुर्य मणि और मोतियो का हार है मैं प्रसन्न मन से आप को अर्पित कर रहा हूँ कृपया इसे स्वीकार करें
वैदिक मंत्र श्रीसूक्त मंत्र का अर्थ): हे माँ आप अपनी बहन अलक्ष्मी को मेरे घर में आने से रोके जो भूख, प्यास और मैल से युक्त है (दरिद्रता) इसका नाश करें हे माता मेरे घर से दरिद्रता को दूर भगाइए, एश्वर्य और समृद्धि की वृद्धि करीये तथा मेरा घर धन और प्रसन्नता सुख आनंद से भर दीजिए अर्थात आप की कृपा हमारे घर के ऊपर हमेशा बनी रहे
पूजा विधि: देवी तथा गणेश जी को सुन्दर आभूषण चढ़ाये सोना चाँदि का सिक्का भी चढ़ा सकते है। इसरे बाद जल छिड़के
श्री महालक्ष्मी-गणपति पूजन: गंध, सिन्दूर, कुङ्कुम और इत्र समर्पण विधि
1. गन्ध समर्पण (कपूर और केसर मिश्रित) संस्कृत मंत्र:
गन्धं कर्पूरसंयुक्तं दिव्यं चन्दनमुत्तमम्।
विलेपनं सुरश्रेष्ठ प्रीत्यर्थं प्रतिगृह्यताम्॥
ॐ गन्धद्वारां दुराधर्षां नित्यपुष्टां करीषिणीम्।
ईश्वरीं सर्वभूतानां तामिहोपह्वये श्रियम्॥
ॐ लक्ष्मीगणपतिभ्याम् नमः। गन्धं समर्पयामि। हिंदी अर्थ (भावार्थ):
कपूर के साथ बना हुआ, बहुत सुंगंधित पदार्थ , उत्तम, दिव्य अलौकिक तथा सुन्दर चंदन ( शरीर में लगाने योग्य लेप ) अर्थात श्रेष्ठ चन्दन मै आप के लिए लाया हुँ ।हे प्रभु मैं आपको प्रसन्न करने के लिए प्रेम पूर्वक लाया हुँ इसे स्वीकार करे
वैदिक मंत्र का अर्थ): जो सुगंधित सुगंध से युक्त हैं, जिन्हें कोई हरा नहीं सकता, जो हमेशा धन-धान्य से पूर्ण रहती हैं, जो पशुधन (गोबर/कृषि समृद्धि) की अधिष्ठात्री हैं और संसार के सभी जीवों की स्वामिनी हैं, मैं उन लक्ष्मी माता का यहाँ आवाहन करता हूँ।
जो सुगंध की तरह सर्व व्याप्त और अदृश्य है जो अजेय है अर्थात जिसे कोई दबा न सके जो हमेशा धनधान्य से भरा हुआ और पुवट रहती है। गाय के गोबर से पुक्त . अर्थात कृषि और समृद्धि का प्रतीक जो अन्न और समृद्धि देना वाला हो जो समस्त जीवों या प्राणियो का स्वामिनी या मालकिन हो उन देवी( माता लक्ष्मी को ) मै प्रेम से बुलाता हुँ
पूजा विधि: अनामिका उँगली से कपूर और केसर मिला हुआ चंदन भगवान गणेश और माता लक्ष्मी को लगाएं। रक्तचन्दन श्रीखण्डचन्दनं दिव्यं गन्धाढ्यं सुमनोहरम्।विलेपनं सुरश्रेष्ठ चन्दनं प्रतिगृह्यताम्॥रक्तचन्दनसम्मिश्रं पारिजातसमुद्भवम्।मया दत्तं महालक्ष्मि चन्दनं प्रतिगृह्यताम्॥ॐ लक्ष्मीगणपतिभ्याम् नमः। रक्तचन्दनं समर्पयामि। हिंदी अर्थ (भावार्थ): लाल चन्दन , सफेद तथा पिला सुगन्धित चन्दन जो अलोकित और दिव्य है । तथा उत्तम है तथा देवता के लिए योग्य है। उत्तम सुगंध से भरा हुआ मनको को मोहने वाला शरीर पर लगाने योग्य चन्दन मै आप को समर्पित करता हुँ । हे देवताओ में श्रेष्ठ देव कृपया इसे स्वीकार करे
पूजा विधि: अनामिका उँगली से भगवान को लाल चंदन (रक्तचंदन) लगाएं।
सिन्दूर मंत्र: सिन्दूरं शोभनं रक्तं सौभाग्यं सुखवर्धनम्। शुभदं कामदं चैव सिन्दूरं प्रतिगृह्यताम्
हिंदी अर्थ (भावार्थ): लाल रंग का पावित्र चूर्ण जिसे हम सिंदुर करते है जो सुंदर सुशोभित और कल्याणकारी होता है। अच्छे भाग्य और वैवाहिक जीवन को सौभाग्य से भर देता है। जो सुख को बढ़ाने वाला है तथा शुभ फल देने वाला होता है कामनाओ को पूरा करने वाला होता है। मै आपको चढ़ा रहा हूँ कृपया इसे स्वीकार करें
वैदिक मंत्र : ॐ सिन्धोरिव प्राध्वने शूघनासो वात प्रमियः पतयन्ति यह्वाः l घृतस्य धारा अरुषो न वाजी काष्ठा भिन्दन्नूर्मिभिः पिन्वमानः l l ॐ लक्ष्मीगणपतिभ्याम् नमः। सिन्दूरं समर्पयामि।
हिन्दी अर्थ : किसी बड़ी नदी या समुद्र के समान अपने सीधे या सही रास्ते पर बहुत तेजी से बहने वाला तेजगति से चलने वाले हवा की गति को मात देने वाले आगे की ओर बढ़ने वाला अत्यंक प्रबल शक्तिशाली वेग वाली धाराएं, लाल रंग का चमकता हुआ यज्ञ की आहुति देने योग्य पवित्र धाराए के सामन सिंदुर ,प्रकाश की तरह प्रवाह होने वाली धी, एक शक्तिशाली घोडे के समान दौडने वाला लकड़ी की रुकावतो को तथा सभी दिशाओ कि बन्धाओं को अपनी लहरो से तोड़ने वाला है वैसे ही भगवान को अर्पित ये सिंदुर या घी हमारे सभी बाधाओ और कष्ट को तोड़ हमें सुख प्रदान करें पूजा विधि: भगवान गणेश को और माता लक्ष्मी को सुंदर लाल सिन्दूर चढ़ाएं। कुङ्कुम : कुङ्कुमं कामदं दिव्यं कुङ्कुमं कामरूपिणम्। अखण्डकामसौभाग्यं कुङ्कुमं प्रतिगृह्यताम्॥ ॐ लक्ष्मीगणपतिभ्याम् नमः। कुङ्कुमं समर्पयामि।
हिंदी अर्थ (भावार्थ) : भगवान को जो रोरी आर्पित किया जाता है। वह सम्पूर्ण मनोकामना को पूर्ण करने वाला होता है। यह अखण्ड सौभाग्य तथा सुख लाने वाला होता है। हे प्रभु मै आपको आर्पित करता हुँ कृपया इसे ग्रहण करें पूजा विधि। गणेशजी को तथा देवी को रोरी प्रेम से लगाये इत्र — दिव्यगन्धसमायुक्तं महापरिमलाद्भुतम् गन्धद्रव्यमिदं भक्त्या दत्तं वै परिगृह्यताम्॥ ॐ लक्ष्मीगणपतिभ्याम् नमः। सुगन्धिततैलं पुष्पसारं च समर्पयामि। हिंदी अर्थ (भावार्थ): अलौकिक और अद्भुत सुगंध से युक्त यह दिव्य इत्र और सुगंधित तेल मैं पूर्ण भक्ति भाव से आपको अर्पित कर रहा हूँ, हे परमेश्वर! कृपा करके इसे स्वीकार करें।
देवतो के योग्य सुगन्ध से भरा हुआ बहुत अधिक सुगंध के कारण अनोखा/ चमत्कारी ( अद्भुत ) यह सुगन्धित वस्तु भक्ति के साथ श्रद्धा पूर्वक मैं आपको आर्पित करता हुँ कृपया इसे स्वीकार करे
पूजा विधि: हे प्रभु मै आपको प्रणाम करता हूँ कहकर सुगंधित तेल या इत्र लगाकर भगवान को अर्पित करें

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